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तौबा ये मतवाली चाल - Song Hindi lyrics and Download

यह गाना पुराने सदाबहार गाने मूवी का है। यह गाना फिल्म- पत्थर के सनम, गीत- मजरूह सुल्तानपुरी, संगीत- लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, गायक- मुकेश । ने गाया है


तौबा ये मतवाली चाल Hindi Lyrics

तौबा ये मतवाली चाल
झुक जाए फूलों की डाल
तौबा ये मतवाली चाल
झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें
तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना तेरी मिसाल कहाँ

तौबा ये मतवाली चाल
झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें
तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना तेरी मिसाल कहाँ
तौबा ये मतवाली चाल

सितम ये अदाओं की रानाइयाँ हैं
सितम ये अदाओं की रानाइयाँ हैं
कयामत है क्या तेरी अँगड़ाइयाँ हैं
बहार-ए-चमन हो, घटा हो धनक हो
बहार-ए-चमन हो, घटा हो धनक हो
ये सब तेरी सूरत की परछाईयाँ हैं
के तन से, उड़ता गुलाल कहाँ
तौबा ये मतवाली चाल
झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें
तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना तेरी मिसाल कहाँ
तौबा ये मतवाली चाल

हूँ मैं भी दीवानों का इक शाहज़ादा
हूँ मैं भी दीवानों का इक शाहज़ादा
तुझे देखकर, हो गया कुछ ज़्यादा
ख़ुदा के लिए मत बुरा मान जाना
ख़ुदा के लिए मत बुरा मान जाना
ये लब छू लिये हैं, यूँ ही बे-इरादा
नशे में इतना ख़याल कहाँ
तौबा ये मतवाली चाल
झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें
तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना तेरी मिसाल कहाँ
तौबा ये मतवाली चाल

यही दिल में है तेरे नज़दीक आ के
यही दिल में है तेरे नज़दीक आ के
मिलूँ तेरे पलकों पे पलके झुका के
जो तुझसा हसीं सामने हो तो कैसे
जो तुझसा हसीं सामने हो तो कैसे
चला जाऊँ पहलू में दिल को दबा के
कि मेरी इतनी मजाल कहाँ

तौबा ये मतवाली चाल
झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें
तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना तेरी मिसाल कहाँ
तौबा ये मतवाली चाल

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प्यार हुआ इकरार हुआ
सौ साल पहले
चंदन सा बदन
हमें तुमसे प्यार कितना
हुई शाम उनका ख़्याल आ गया
मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
लागी छूटे ना अब तो सनम
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ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना
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किसी राह में किसी मोड़ पर
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छूकर मेरे मन को
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छोड़ दे सारी दुनिया
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दिल चीज़ क्या है
आज उनसे पहली मुलाक़ात होगी
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खोया खोया चाँद खुला आसमान
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हर दिल जो प्यार करेगा
तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
ज़िन्दगी का सफ़र है सुहाना
तुम बिन जाऊँ कहाँ
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आ लौट के आजा मेरे मीत
तेरी महफ़िल में क़िस्मत आज़मा कर
वो शाम कुछ अजीब थी
छू लेने दो नाज़ुक होंठों को
किसी की मुस्कराहटो पे
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महबूब मेरे महबूब मेरे
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आप के पहलू में आ कर
चौदहवीं का चाँद हो
ज़िन्दगी के सफ़र में
लिखें जो ख़त तुझे
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में
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गुनगुना रहें है भँवरे
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रुके रुके से कदम
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चिनगारी कोई भड़के
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निगाहें मिलाने को
शरमा के अगर यूँ परदानशीं
इशारों इशारो में
मिलते ही नजर तुम से
तू कितनी अच्छी है
बड़ा नटखट है ये
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा
अँखियों को रहने दे
दिल तो है दिल