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रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा - Song Hindi lyrics and Download

यह गाना पुराने सदाबहार गाने मूवी का है। यह गाना फिल्म- दिल एक मंदिर, गीत- शैलेन्द्र, संगीत- शंकर जयकिशन, गायिका- लता मंगेशकर। ने गाया है


रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा Hindi Lyrics

(रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा
रुके ना मिलन की बेला
आज चाँदनी की नगरी में
अरमानों का मेला ) -२
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा

पहले मिलम की यादें लेकर
आई है ये रात सुहानी
पहले मिलम की यादें लेकर
आई है ये रात सुहानी
दोहराते है फिर ये सितारे
मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी
मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी

रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा
रुके ना मिलन की बेला
आज चाँदनी की नगरी में
अरमानों का मेला
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा

कल का डरना काल की चिन्ता
दो तन है मन एक हमारे

कल का डरना काल की चिन्ता
दो तन है मन इक हमारे
जीवन सीमा के आगे भी
आऊँगी मै संग तुम्हारे
आऊँगी मै संग तुम्हारे

रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा
रुके ना मिलन की बेला
आज चाँदनी की नगरी में
अरमानों का मेला
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा
रुके ना मिलन की बेला
आज चाँदनी की नगरी में
अरमानों का मेला
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा

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प्यार हुआ इकरार हुआ
सौ साल पहले
चंदन सा बदन
हमें तुमसे प्यार कितना
हुई शाम उनका ख़्याल आ गया
मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
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ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना
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तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया
तेरी आँखों के सिबा
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बेक़रार करके हमें यूँ ना जाइये
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तुम बिन जाऊँ कहाँ
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ज़िन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
आ लौट के आजा मेरे मीत
तेरी महफ़िल में क़िस्मत आज़मा कर
वो शाम कुछ अजीब थी
छू लेने दो नाज़ुक होंठों को
किसी की मुस्कराहटो पे
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पल पल दिल के पास
महबूब मेरे महबूब मेरे
आजा रे अब मेरा दिल
रहें ना रहें हम
कहीं दूर जब दिन ढल जाये
आप के पहलू में आ कर
चौदहवीं का चाँद हो
ज़िन्दगी के सफ़र में
लिखें जो ख़त तुझे
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में
मेरे दिल में आज क्या है
बेदर्दी बालमा तुझको
एहसान तेरा होगा मुझ पर
तौबा ये मतवाली चाल
कहता है जोकर सारा ज़माना
एक प्यार का नगमा है
जिस गली में तेरा घर
गुलाबी आँखें जो तेरी
लम्बी जुदाई
तेरी बिन्दिया रे
सावन का महीना
लूटे कोई मन का नगर
ओ बाबुल प्यारे
तेरे बिना जिन्दगी से
जो बादा किया वो निभाना पडेगा
आजा तेरी याद आई
वादा करले साजना
जो तुमको हो पसन्द
रुत है मिलन की साथी मेरे
मन क्यूँ बहका री बहका
बिन्दिया चमकेगी
जाने क्यों लोग मोहब्बत
मिलो ना तुम तो हम घबरायें
छुप गये सारे नजारे
अब के सजन
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कहाँ से आये बदरा
दिल में तुझे बिठाके
सोलह बरस की
मेरी साँसों तो जो महका
मै तुम में समा जाऊँ
आपकी आँखों में कुछ
पत्थर के सनम
ओ मेरे दिल के चैन
दिल के झरोखे में
चाँद सी महबूबा हो मेरी
ये शाम मस्तानी
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रुके रुके से कदम
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निगाहें मिलाने को
शरमा के अगर यूँ परदानशीं
इशारों इशारो में
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बड़ा नटखट है ये
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