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किसी राह में किसी मोड़ पर - Song Hindi lyrics and Download

यह गाना पुराने सदाबहार गाने मूवी का है। यह गाना िफल्म- मेरे हमसफ़र, गीत- आनन्द बक्षी, संगीत- कल्यानजी आनन्दजी, गायक- लता मंगेशकर, मुकेश । ने गाया है


किसी राह में किसी मोड़ पर Hindi Lyrics

किसी राह में किसी मोड़ पर (२)
कहीं चल ना देना तू छोड़ कर
मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र (२)

किसी हाल में किसी बात पर
कहीं चल ना देना तू छोड़कर
मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र (२)

मेरा दिल कहे कहीं ये ना हो (२)
नहीं ये ना हो नहीं ये ना हो
किसी रोज़ तुझ से बिछड़ के मै
तुझे ढूँढती फिरू दरबदर
मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र (२)

तेरा रंग साया बहार का (२)
तेरा रूप आईना प्यार का

तुझे आ नज़र में छुपा लूँ मै
तुझे लग ना जाये कहीं नज़र
मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र (२)

तेरा साथ है तो है ज़िंदगी (२)
तेरा प्यार है तो है रोशनी (२)
कहाँ दिन ये ढल जाये क्या पता
कहाँ रात हो जाये क्या ख़बर
मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र (२)

किसी राह में किसी मोड़ पर
कहीं चल ना देना तू छोड़ कर
मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र (२)

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प्यार हुआ इकरार हुआ
सौ साल पहले
चंदन सा बदन
हमें तुमसे प्यार कितना
हुई शाम उनका ख़्याल आ गया
मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
लागी छूटे ना अब तो सनम
किसी पत्थर की मूरत से
जम डम डिगा डिगा
मिलती है ज़िन्दगी में मोहब्बत कभी कभी
ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना
आज फिर तुम पे प्यार आया है
तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया
तेरी आँखों के सिबा
तू प्यार का सागर है
कोई नहीं है फिर भी है मुझको
अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो
मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा
बेक़रार करके हमें यूँ ना जाइये
याद ना जाये बीते दिनों की
अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा
छूकर मेरे मन को
तू जहाँ जहाँँ चलेगा
रुला के गया सपना मेरा
सुहानी रात ढल चुकी
लग जा गले
तेरी गलियों में ना रखेंगे क़दम
छोड़ दे सारी दुनिया
होंठों से छूलो तुम
ओह रे ताल मिले
अब तो है तुमसे हर ख़ुशी अपनी
दिल चीज़ क्या है
आज उनसे पहली मुलाक़ात होगी
कोई होता जिसको अपना हम अपना
खोया खोया चाँद खुला आसमान
तुम्हीं मेरे मंदिर
उनसे मिली नज़र के मेरे होश
हज़ार राहें मुड़ के देखीं
हर दिल जो प्यार करेगा
तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
ज़िन्दगी का सफ़र है सुहाना
तुम बिन जाऊँ कहाँ
मैं पल दो पल का शायर हूँ
पर्दे में रहने दो
मेरी भीगी भीगी सी पलकों पे
दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा
रंगीला रे तेरे रंग में
दिल तडफ तडफ के कह रहा
हमें और जीने की चाहत
ज़िन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
आ लौट के आजा मेरे मीत
तेरी महफ़िल में क़िस्मत आज़मा कर
वो शाम कुछ अजीब थी
छू लेने दो नाज़ुक होंठों को
किसी की मुस्कराहटो पे
तेरे चेहरे में वो जादू है
पल पल दिल के पास
महबूब मेरे महबूब मेरे
आजा रे अब मेरा दिल
रहें ना रहें हम
कहीं दूर जब दिन ढल जाये
आप के पहलू में आ कर
चौदहवीं का चाँद हो
ज़िन्दगी के सफ़र में
लिखें जो ख़त तुझे
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में
मेरे दिल में आज क्या है
बेदर्दी बालमा तुझको
एहसान तेरा होगा मुझ पर
तौबा ये मतवाली चाल
कहता है जोकर सारा ज़माना
एक प्यार का नगमा है
जिस गली में तेरा घर
गुलाबी आँखें जो तेरी
लम्बी जुदाई