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कहीं दूर जब दिन ढल जाये - Song Hindi lyrics and Download

यह गाना पुराने सदाबहार गाने मूवी का है। यह गाना फ़िल्म-आनन्द, संगीत- सलिल चौधरी, गायक- मुकेश । ने गाया है


कहीं दूर जब दिन ढल जाये Hindi Lyrics

कहीं दूर जब दिन ढल जाये
साँझ की दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आये
मेरे ख़यालों के आँगन में
कोई सपनों के दीप जलाये
कहीं दूर जब दिन ढल जाये
साँझ की दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आये

(कभी यूँ ही जब हुई बोझल साँसें
भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही आँखें) (२)
तभी मचल के प्यार से चल के
छुए कोई मुझे पर नज़र ना आये,नज़र ना आये
कहीं दूर जब दिन ढल जाये
साँझ की दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आये

(कहीं तो ये दिल कभी मिल नहीं पाते
कहीं से निकल आये जनमों के नाते) (२)
है मीठी उलझन बैरी अपना मन
अपना ही हो के सहे दर्द पराये, दर्द पराये
कहीं दूर जब दिन ढल जाये
साँझ की दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आये

(दिल जाने मेरे सारे भेद ये गहरे
खो गये कैसे मेरे सपने सुनहरे) (२)
ये मेरे सपने यही तो है अपने
मुझसे जुदा न होंगे इनके साये, इनके ये साये
कहीं दूर जब दिन ढल जाये
साँझ की दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आये
मेरे ख़यालों के आँगन में
कोई सपनों के दीप जलाये
कहीं दूर जब दिन ढल जाये
साँझ की दुल्हन बदन चुराये
चुपके से आये

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चौदहवीं का चाँद हो
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लम्बी जुदाई
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